शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ एजुकेशन द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर  "महात्मा गांधी की खोज: उनके विचारों की प्रासंगिकता और शिक्षा में सिद्धांतों" पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
किया गया।

इग्नू के पूर्व वाईस चांसलर प्रोफेसर रविंद्र कुमार और हरिजन सेवक संघ के उपाध्यक्ष लक्ष्मी दास जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर संगोष्ठी की शोभा बड़ा रहे थे।

मुख्य अतिथियों का स्वागत शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ एजुकेशन की डीन डॉ आरती कौल कचरू ने किया।  संगोष्ठी में वाईस चांसलर डॉ. जी. आर. सी. रेड्डी और अन्य संकायों के डीन के साथ-साथ विभाग के सारे अध्यक्ष, अधिकारी मौजूद थे।

               डॉ आरती कौल कचरू ने कहा की आधुनिक शिक्षा प्रणाली मानवीय मूल्यों और नैतिकता के सिद्धांतों को मिटा रही है। असहिष्णुता का बढ़ना, लालिमा, सांप्रदायिक सद्भाव की हानि, विश्वास की हानि, युवा दिमाग में हिंसा का बढ़ना, जो हमें गांधीवादी शिक्षा की बहाली के लिए याद दिलाते हैं।

       डॉ. जी. आर. सी. रेड्डी ने कहा कि गांधी जी एक महान शिक्षाविद थे, उनका मानना था कि किसी देश की सामाजिक, नैतिक और आर्थिक प्रगति अंततः शिक्षा पर निर्भर करती है। उनकी राय में शिक्षा का सर्वोच्च उद्देश्य आत्म-मूल्यांकन है। उनके अनुसार, छात्रों के लिये चरित्र निर्माण सबसे महत्त्वपूर्ण है और यह उचित शिक्षा के अभाव में संभव नहीं है।

                लक्ष्मी दास जी ने कहा कि गांधी जी की शिक्षा अवधारणा को बुनियादी शिक्षा के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में नैतिक और धार्मिक शिक्षा को शामिल करने पर बल दिया और अच्छे चरित्र का निर्माण करना,आदर्श नागरिक बनना,स्वावलंबी बनना को सर्वांगीण विकास शिक्षा की अवधारणा बताया है।

                प्रोफेसर रविंद्र कुमार ने कहा की सामाजिक सामंजस्य और सदभाव जैसे मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए, वर्तमान शिक्षा प्रणाली में उभरने वाले मुद्दों और चुनौतियों का समाधान करने के लिए गाँधी जी के शैक्षिक विचारों और सिद्धांतों पर पुनर्विचार और खोज करने की निरंतर आवश्यकता है।

               हिमाचल प्रदेश की केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग से आये डॉ. नवनीत शर्मा ने कहा की वर्तमान शिक्षण पद्धति में गांधीवादी शैक्षिक आदर्शों और सिद्धांतों को शामिल करने और नवीन पाठ्यक्रम और संस्थागत प्रथाओं के निर्माण पर जोर देने की आवश्यकता है ।

                 संगोष्ठी के संयोजक डॉ. पंकज दास ने कहा की समाज को बेहतर बनाने के लिए, निरंकुश राजसत्ता पर जनता के प्रभावी अंकुश के लिए, नया समाज गढ़ने के लिए, जड़ीभूत मूल्यों और ढांचे के ध्वंस के लिए और स्वयं अपने भीतर के कलुषों को भगाने के लिए गाँधी जी पर निरंतर संगोष्ठीयो का आयोजन होना चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में डॉ जी. आर. सी. रेड्डी  और डॉ आरती कौल कचरू द्वारा मुख्य अतिथियो को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया और धन्यवाद ज्ञापन किया गया।


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