जमीनी स्तर पर उद्यमियों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है :अशोक कुमार
लॉकडाउन में देश में विभिन्न समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं। औद्योगिक इकाइयाँ एवं प्रतिष्ठान भी इसी प्रकार की समस्याओं से जूझ रहे हैं। सरकारों ने औद्योगिक समूहों एवं संगठनों द्वारा समय-समय पर की जा रही मांगों का संज्ञान लेते हुए कई तरह की राहत देने वाली घोषणाएँ की हैं। केन्द्र सरकार ने राहत पैकेज की घोषणा की है। प्रदेश सरकार ने भी अपने स्तर से कई प्रयास किए हैं। इसके बावजूद औद्योगिक इकाइयों एवं प्रतिष्ठानों को जमीनी स्तर पर इनका लाभ नहीं मिल रहा है। ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्री एसोसिएशन (अग्नि) के अध्यक्ष सहदेव शर्मा के अनुसार अधिकांश सरकारी घोषणाओं के बारे में उद्यमियों को कोई जानकारी नहीं है, देश की औद्योगिक इकाइयों के सम्मुख उत्पन्न समस्याओं को लेकर माननीय श्री आदित्यनाथ योगी जी को 3/6/ 2020 को  पत्र लिखा गया था।
अशोक कुमार (संगठन मंत्री अग्नि) का कहना है कि सरकार ने औद्योगिक इकाइयों की मदद के लिए 2002.49 करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी तथा 56,754 इकाइयों को ऑनलाइन ऋण उपलब्ध भी कराया जा चुका है। लेकिन इसके बारे में औद्योगिक इकाइयों के संचालकों को कोई जानकारी नहीं है। अभी तक इसकी जानकारी भी संबंधित संस्थाओं द्वारा मुहैया नहीं कराई गई है. केन्द्रीय कैबिनेट ने पात्र एमएसएमई इकाइयों तथा इच्छुक मुद्रा ऋण प्राप्तकर्ताओं की मदद के लिए आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना के अन्तर्गत 3 लाख करोड़ की धनराशि मंजूर की। जानकारी के अभाव में इसका भी उद्यमियों को लाभ नहीं मिल सका है। सरकार ने बैंकों को औद्योगिक इकाइयों की मदद के लिए ऋण मुहैया कराने के लिए कहा था। बताया गया कि बैंकों की ओर से 4 लाख करोड़ के ऋण आवंटन को मंजूरी दी गई। कहा कि औद्योगिक इकाइयाँ एवं प्रतिष्ठान ऋण लेने से इंकार कर रहे हैं। यह बात गलत है। उद्यमी ऋण प्राप्त कराना चाहते हैं, लेकिन बैंक इस तरह की किसी भी गाइडलाइन के जारी होने से इंकार कर रहे हैं, उद्यमियों को आर्थिक मदद ऋण की बजाए सीधे इकाइयों को मुहैया कराई जाए।
आदित्य घिल्डियाल (उपाध्यक्ष अग्नि) के अनुसार औद्योगिक इकाइयों में पूर्व में हुई हिंसक घटनाओं तथा अपराधिक हस्तक्षेप से कामकाज प्रभावित होता था। सरकार के प्रयासों से इसमें कमी आई है। हाल ही में ग्रेजियानों कम्पनी के सीईओं को भी ई-मेल से धमकी दी गई। सरकार ने मामलें को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कार्रवाई करके आरोपी को जेल भेजा है। इससे उद्यमियों ने राहत की सांस ली है।
ए के पचौरी (महामंत्री अग्नि) ने कहा कि कंटेनर डिपो दादरी में औद्योगिक इकाइयों का कच्चा माल एवं उत्पादित सामान बड़ी संख्या में पड़ा हुआ है। लॉकडाउन के कारण यह सामान यहीं पर फस गया है जिसके कारण इकाइयों से डैमरेज चार्ज- क्रय अथवा अन्य डयूटी के रूप में मांगा जा रहा है। केन्द्र सरकार द्वारा लॉकडाउन के सम्बन्ध में की गई घोषणा के अनुसार इस चार्ज से उद्यमियों को मुक्त किया जाए।इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दिल्ली से ग्रेटर नोएडा बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयों के अधिकारी तथा कर्मचारी आते हैं। यातायात की व्यवस्था सुगम बनाने के लिए कासना बस डिपो से औखला बस डिपो तक सीधी बस सेवा शुरू की जाए।केन्द्र एवं राज्य सरकारों की घोषणा के बावजूद अन्तर्राज्यीय सीमा को बिना किसी पूर्व घोषणा के बंद कर दिया जाता है। ऐसे में दिल्ली एनसीआर के लोगों के बीच अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। लोगों को औद्योगिक इकाइयों तक आने जाने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इससे प्रतीत होता है कि दिल्ली, यूपी, हरियाणा तथा केन्द्र सरकार के बीच आपसी सामंज्स्य का अभाव है।
मुकेश शर्मा (सचिव अग्नि). के अनुसार औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रक्रिया को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए धीरे-धीरे शुरू किया जा रहा है। इसके बावजूद इकाइयों में काम पटरी पर नहीं लौट रहा है। अत: रात्रि में एक अन्य शिफ्ट शुरू की जाए।इनके साथ ही अभी तक जितने भी सीईटीपी लगे हुए हैं वह अधिकतर बंद पड़े हैं अथवा महज औचारिकताएं पूरी करते हैं।ग्रेटर नोएडा औद्योगिक क्षेत्र में सारा गंदा पानी इधर-उधर बहता है। यहां सरकार द्वारा एक सामुहिक सीईटीपी होनी चाहिए। औद्योगिक क्षेत्र के गंदे पानी के लिए एक अलग से लाइन होनी चाहिए। इस पानी को एक अलग लाइन में डाला जाए। प्रत्येक औद्योगिक इकाई को उसके द्वारा बहाए गए गंदे पानी के हिसाब से बिल भेजा जाए। इससे पर्यावरण भी सुरक्षित होगा।
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