प्राधिकरण की  टीम ग्रामीण क्षेत्र में  नजर नहीं आती जबकि जिले की पुलिस का कार्य काबिले तारीफ। रविन्द्र भाटी



गौतमबुद्ध नगर। आज पूरे उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा कोरोना के मरीज जिला गौतम बुद्ध नगर में है जिले की आबादी लगभग 22 लाख के आसपास है इस बारे में एडवोकेट रविंद्र भाटी प्रदेश अध्यक्ष अखिल भारतीय गुर्जर परिषद राष्ट्रीय कोर कमेटी आजाद समाज पार्टी कहते हैं कि जहां बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर लेबर के रूप में काम करने वाले जिनके पास रहने के लिए मकान नहीं है प्रतिदिन कमाना प्रतिदिन खाना आज भूखा मरने की स्थिति बन गई है और पूरे देश में एक मात्र यही जिला है जिसमें पंचायत या निगम चुनाव नहीं है सरकार की जो तमाम जनहितकारी योजनाएं गरीब मजदूर के लिए लागू होती है पंचायत चुनाव में होने की वजह से वो भी जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच रही हैं यदि आज जिले में ग्राम प्रधान या जिला पंचायत सदस्य होते तो कोरोना जैसी महामारी से लड़ने में जिले में आसानी होती ग्राम प्रधान वे जनप्रतिनिधि लॉक डाउन की स्थिति में अपने अपने क्षेत्र की जिम्मेदारी लेते हुए जरूरतमंद लोगों तक सामान सुरक्षा किट व खाना पहुंचाते और प्रशासन को भी सहयोग मिलता मुख्यमंत्री  ने जिले में लापरवाही बरतने पर डीएम व जिला चिकित्सक अधिकारी का स्थानांतरण किया लेकिन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण की लापरवाही एवं गांवों के प्रति उदासीन रवैया पर कोई कार्रवाई नहीं की गांवों में भी सुरक्षा कीट एवं सैनिटाइज कराया जाना चाहिए था यह व्यवस्था प्राधिकरण के अधिकारियों को करनी चाहिए थी लेकिन ग्रामीण क्षेत्र प्राधिकरण के एजेंडे में ही नहीं है जबकि तीनों प्राधिकरण को शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र के प्रति उत्तरदायित्व का निर्वाह भी करें और जिले के तीनों प्राधिकरण सुनिश्चित करे की जिले में कोई भी गरीब या जरूरतमंद भूखा ना रहे किसानों की जमीन को कौड़ियों के भाव में हथियाने वाले ग्रामीण क्षेत्र देहात में रहने वाले किसान व उनके परिवार वालों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं घोर लापरवाही का आलम यह है कि अभी तक ग्रामीण क्षेत्र को सैनिटाइज नहीं किया गया है जबकि कोरोना ग्रामीण क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है यदि किसी गांव में अधिकारी जाते हैं औपचारिकता निभाते हुए 4 या 6 घरों तक छिड़काव कर वापस लौट जाते हैं प्राधिकरण ने जमीन हड़पने की नियत से 283 ग्राम पंचायतों को भंग करके इंडस्ट्रियल टाउनशिप घोषित करा कर जनप्रतिनिधित्व को समाप्त कर दिया गया है प्राधिकरण की  टीम ग्रामीण क्षेत्र में  नजर नहीं आती जबकि जिले की पुलिस का कार्य काबिले तारीफ है वह हर गांव में जरूरतमंद के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं राजस्थान में ग्रामीण क्षेत्र में कोरोनावायरस से लड़ने के लिए 60 करोड़ राशि पंचायतों को आवंटित की है अतः आपसे अनुरोध और निवेदन यह है कि जन भावना और वोट डालने के संवैधानिक अधिकार को देखते हुए पंचायत चुनाव व नगर निगम चुनाव बहाल किए जाएं ताकि सरकार द्वारा नगर निगम या ग्रामीण क्षेत्र के लिए चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाएं हर जरूरतमंद गरीब तक पहुंच सकेें।
Share To:

Post A Comment: