भारत को सुरक्षित सोर्सिंग डेस्टिनेशन बताने के लिए ईपीसीएच का 'नमस्ते इंडिया' अभियान।

नई दिल्ली।  कोरोना वायरस को लेकर पूर्वी एशिया खासकर चीन में उपजी स्थित की वजह से ग्लोबल वैल्यू चेन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. कोरोना वायरस के साथ चल रही लड़ाई दुनिया की अर्थव्यवस्था को परेशानी में डालने का खतरा उत्पन्न कर रही है. दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन, जो वैश्विक जीडीपी का 15% से भी बड़ा हिस्सा है, उसकी खपत में आई बड़ी कमी से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर और भार पड़ने की उम्मीद है.

हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के महानिदेशक  राकेश कुमार ने कहा कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ हमदर्दी रखता है और उम्मीद करता है कि कोरोना वायरस का जो खतरा चीन को घेर चुका है धीरे धीरे दुनिया के बाकी हिस्सों में फैल रहा है, उस पर नियंत्रण पा लिया जाएगा और आगे इससे किसी की मौत नहीं होगी।

भारत में इस रणनीति पर चर्चाएं और विचार विमर्श की गई कि चीन से आपूर्ति में आई कमी की भरपाई के लिए दुनिया भर के खरीदारों को भारत को एक वैकल्पिक सोर्सिंग हब के रूप में प्रोत्साहित किया जाए जिससे भारत को विश्वसनीय, सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी आपूर्तिकर्ता के रूप में नए अवसर प्राप्त हों.

उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक बाजार के 2021 की गर्मियों से पहले वर्तमान स्थिति से उबरने की उम्मीद नहीं है. इस दौरान आपूर्ति को लेकर एक बहुत बड़ा खालीपन होगा, लिहाजा भारत के पास अमरीका और यूरोपीय संघ में प्रमुख हस्तशिल्प खरीदारों के बीच चीन की जगह लेने का बड़ा अवसर है.

ईपीसीएच के महानिदेशक  राकेश कुमार ने इस मुद्दे पर बात करते हुए 'नमस्ते इंडिया’ से जुड़े कुछ नए और साहसिक सुझाव भी दिए, ताकि विदेशी खरीदार भारतीय मेलों की ओर आकर्षित हों और वो भारत को एक सुरक्षित हब और आपूर्ति के लिए तैयार देश के रूप में देख सकें. यह प्रचार अभियान 'नमस्ते इंडिया' के इर्द-गिर्द बुनने के पीछे दुनिया को यह कड़ा संदेश देना है कि अगर भारत अमरीकी राष्ट्रपति और उनके पूरे प्रतिनिधिमंडल के लिए सुरक्षित है तो दुनिया भर के अन्य लोगों के लिए भी भारत आना समान रूप से सुरक्षित है.








इसके अलावा  कुमार ने 'नमस्ते इंडिया' अभियान चलाने को लेकर अमरीका और यूरोपीय संघ में ट्रैवल एजेंट्स को लुभाने का भी एक स्पष्ट आइडिया दिया. उन्होंने सुझाव दिया कि ट्रेड फैसिलिटेशन ऑफिसर्स को विदेशों में भारतीय मिशनों में और साथ ही टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल्स और टेक्सटाइल मंत्रालय में समन्वित तरीके से काम करने का सुझाव दिया जाए ताकि भारतीय हस्तशिल्पों और टेक्सटाइल (टेक्निकल टेक्सटाइल समेत) को बढ़ावा दिया जा सके.

 कुमार ने आगे सुझाव दिया कि होम, लाइफस्टाइल, फैशन, फर्नीचर और टेक्सटाइल के प्रमुख बाजारों में पारंपरिक (प्रिंट) और डिजिटल मार्केटिंग टूल का उपयोग करते हुए एक आक्रामक प्रचार अभियान चलाया जाए और इसके जरिए यह संदेश दिया जाए कि भारत सुरक्षित और सबसे उत्तम सोर्सिंग गंतव्य है.

भारत इस संकट की घड़ी का उपयोग विनिर्माण के क्षेत्र में चीन के सामानों की अनुपलब्धता को पूरा करने और बाजार के एक बड़े हिस्से पर अपनी पकड़ बनाने के एक आदर्श अवसर के रूप में कर सकता है और इसके साथ ही भारत सरकार के 'मेक इन इंडिया' के प्रयासों को प्रोत्साहित कर सकता है.
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