ऐतिहासिक नगरी दनकौर का ऐतिहासिक होने का कारण दनकौर में स्थित श्री द्रोणाचार्य मंदिर ही है।जिसके प्रांगण में स्थित द्रोण तालाब की स्थिति आज काफी विचारणीय है इस बारे में दनकौर निवासी कृष्ण भाटी का कहना है कि हर वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य पर 10 दिवसीय मेले का आयोजन भी इसी मंदिर के प्रांगण में होता है और तालाब में प्राचीन समय से ही अनेक मल्लों द्वारा कुश्ती का प्राचीन खेल खेला जाता है।दर्शक तालाब की सीढ़ियों पर बैठकर ही घंटों खेल का आनंद लेता है।मंदिर के नाम पर अनेक संस्थाये है जिनमें अस्पताल, कॉलेज, स्कूल,गऊशाला और काफ़ी दानदाताओं आदि के होते हुए भी तालाब की इस प्रकार की स्थिति क्यों हैं?तालाब की यह स्थिति आज कल में ही ऐसी नही हुई हैं काफी वर्षों से इसी प्रकार बनी हुई है।जिसे विस्तृत करने की आवश्यकता नहीं है।



आयोजक स्टेज पर अपनी कुर्सी को भूलकर सीढ़ियों पर बैठकर कुश्ती देखने वाले दर्शकों के विषय में भी जरूर सोचें
,और तालाब के पुनः सौदंर्यकरण के विषय में भी जरूर सोचे।

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