सुनील नागर के जज़्बे को सलाम।  जिसे लोग समझ रहे थे पागल उसे  परिजनों से मिलवाया।
सुनील नागर ने  विकास यादव को उसके घर बिहार पहुंचवाया। सुनील नागर के इस काम की सोशल मीडिया पर हो रही है जमकर तारीफ। 
गौतमबुद्ध नगर।(शफ़ी मोहम्मद सैफी) मानसिक रूप से अस्वस्थ विकास पिछले कई दिनों से ग्रेटर नोएडा के एक डंपिंग ग्राउंड पर भूखे प्यासे पड़े थे। शरीर जवाब दे चुका था। हर मिनट प्रशासन , अथॉरिटी सहित सैकड़ो गाड़ियां गुजर रही थी लेकिन कंक्रीट के संवेदना रहित शहर में भूख से निढाल हो चुके विकास तक उनकी नजर शायद ना पहुँच पा रही हो । कल सुनील ने किसी काम से लौटते हुए अचानक इन्हें देखकर गाड़ी रोकी और हाल चाल पूछा। विकास शुरू में कुछ बताने को तैयार नही थे। पर थोड़ी देर में ही बाते करने लगे। कई बार अंग्रेजी तो कई बार दोहे और संस्कृत के शब्दो से मुझे आश्चर्य होने लगा था।
जब बातों बातों में मैंने कहा कि क्या आपको मुझपर विश्वास नही , तो विकास ने अपने पास पड़े एक पुराने पॉलिथीन बैग की तरफ इशारा करके कहा कि विश्वास तो मुझे अपने देश के झंडे पर भी है जिसे नीचे पड़ा देख मैंने अपने बैग में डाल लिया, ये कहकर विकास अपने पॉलिथीन में ढेरो कटे फटे कागज के टुकड़ो में तिरंगा तलाशने लगा।
थोड़ी देर तक विकास इधर उधर की बाते करता रहा, मुझे अपना नाम पप्पू बताया । वहीं बैठकर विकास से आधा घंटे तक बात की और जानकारी निकालने का प्रयास करता रहा।इस दौरान विकास ने कुछ नंबर बताये जिनमे एक नंबर पूरे 10 डिजिट का था । सुनील ने नंबर मिलाया तो वो उनके एक रिश्तेदार का निकला। उन्हें परिस्थिति बताने पर उन्होंने तुरंत वीडियो कॉल की और विकास को देखा । वीडियो कॉल पर उन्हें देखकर विकास ने उन्हें पहचान लिया और  रोने लगा। ये इनके फूफाजी का नंबर था । उन्होंने मुझे बताया कि इसका नाम विकास है और सालो पहले असमय माता पिता की मृत्यु होने के बाद विकास की मानसिक स्थिति खराब हो गयी थी और इलाज बीच में छोड़कर विकास घर से निकल गया !  पिछले 4 - 5 महीने से उसका कुछ पता नही था। विकास के चाचा नेशनल प्लेयर रह चुके है और सरकार द्वारा पुरस्कृत है। तब तक 100 नंबर पर कॉल कर बुलाई पुलिस आ गयी थी। 108 नंबर पर एम्बुलेंस के लिए कॉल करके जब उन्हें बताया कि मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के लिए मदद की जरूरत है तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि हमारे यहाँ प्रावधान नही है मानसिक रोगियों के लिए ।फिर पुलिस की मदद से एम्बुलेंस बुलाई और उन्हें हॉस्पिटल पहुँचाकर प्राथमिक जांच करवाई । जहां डाक्टर्स ने भी सहयोग किया और आगे भी सहयोग करने की बात की । उसके बाद एक मित्र और एक गार्ड ने कपड़े उपलब्ध कराए । साथ ही एक सैलून पर ले जाकर इनके बाल कटवाकर सही हालत में लाये। तब तक रात के 8 बज चुके थे। उसके बाद पास के थाने में लेकर पहुंचा और लगातार विकास के फूफाजी KP yadav  से बात होती रही। उसके बाद रात करीब 10.30 बजे तक इनके परिजन मेरे पास पहुँच चुके थे। विकास यादव उर्फ पप्पू को उसके परिजनों को सौंपा तो सुनील की  खुशी का ठिकाना नहीं रह
मात्र 9 घंटे में विकास को उसके परिजन लेकर रवाना हो गए। पिछली घटना में पंजाब के खोए एक युवक अंग्रेज सिंह को जब उनके परिवार से मिलाया था तो उन्हें कोई नंबर तक याद नही था तब फेसबुक सहारा बनी थी, लेकिन इस बार किस्मत से इनके बड़बड़ाये कुछ नंबरो में से एक नंबर बिल्कुल सही जा लगा और काम बन गया।

 इस बारे में सुनील का कहना है कि पहली बार में ये युवक 55 -60 साल का दिख रहा था लेकिन थोड़ी देर बाद स्थिति सही होने पर और कटे फटे चीथड़े बदलने, नहलाने और बाल कटवाने पर ये सिर्फ 36 -37 साल का युवक निकला।
ऐसे मामलों में आधी बीमारी मरीज को ठीक से खाना मिलने और साफ सफाई से ही ठीक हो जाती है व्यवहार बदल जाता है।
मानसिक रोगियों को अछूत समझकर उन्हें दुत्कारिये मत , नफरत मत कीजिये , बस सरकारी संसाधनों और मशीनरी का उपयोग करते हुए प्रयास कीजिये !
 एक भारतीय नागरिक होने के नाते ऐसी स्थिति में सरकार का कर्तव्य है हर नागरिक की रक्षा करना , उस अधिकार को समय समय पर सरकारों को याद दिलाते रहिये ।
 हालांकि शिकायतें बहुत है इस सिस्टम से , लेकिन जिस जिस ने भी कल मदद की वे भी इसी तंत्र और समाज का हिस्सा थे और मदद को तत्पर दिखे । आज शिकायत कर उन सब को निराश नही करना चाहता !  उन्हें ढेर सारा धन्यवाद । विकास अब अपने परिजनों के बीच है ।






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