गौतमबुद्धनगर।
(शफी मोहम्मद सैफी)कहते हैं कि चुनाव बड़ा हो या छोटा मतदान से पहले की रात बड़ी महत्वपूर्ण होती है उस रात को औपचारिक तौर पर चुनाव प्रचार तो पूरी तरह रुक जाता है लेकिन व्यक्तिगत तौर पर वोट को अपने पक्ष में करने को अपने पक्ष में करने के प्रयास सभी प्रत्यासी करते हैं इस दौरान माफी का भी दौर चलता है रात को विरोधियों के समर्थकों मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए जाति बिरादरी धर्म की दुहाई देकर मतदान करने की पूरी कोशिश की जाती है यहां पर कसम धर्म का दौर भी चलता है ऐसे कर के मतदाता एवं समर्थकों के द्वारा याद दिलाया जाता हैं कि वह उसके पक्ष में मतदान करेंगे इस रात सारा काम होता है  इसमें प्रत्यासी और उसके समर्थक पूरी रात नहीं सोते और चौकन्ना हो कर विरोधियों की हर गतिविधि पर नजर रखते हैं हालांकि इस दिन चुनाव प्रचार बंद हो जाता है लेकिन असली प्रचार इसी रात होता है हर पार्टी का प्रयास रहता है कि चुनाव के अंतिम क्षणों में विरोधी खेमे में सेंध लगा कर वोट अपने पक्ष में की जाए  और अपने खेमे में प्रभावशाली कार्यकर्ता एवं मतदाताओं को हर हालत में लाया जाए इस रात को धनबल का भी जमकर इस्तेमाल होता है जानकारी के अनुसार मतदान से पूर्व की रात को इस काम के लिए मुख्य तौर पर चुना जाता है यदि विरोधी पार्टियां उम्मीदवार को किस बात की भनक लग जाए तो उसका प्रभाव भी काम न कर पाए।
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