ग्रेटर नोएडा। ईपीसीएच के महानिदेशक  राकेश कुमार ने सूचित किया कि आईएचजीएफ दिल्ली मेला के स्प्रिंग संस्करण का आयोजन फरवरी की जगह 15 से 19 अप्रैल 2020 में किया जाएगा.
श्री कुमार ने तारीख बदले जाने की वजह बताई कि परिषद ने 2019 के स्प्रिंग संस्करण के खत्म होने के बाद प्रदर्शकों और खरीदारों के बीच एक सर्वे कराया था ताकि आयोजन की तारीख को फरवरी से बदलकर अप्रैल, यनी चीन और हांगकांग मेले से पहले, करने पर उनकी प्रतिक्रिया ली जा सके और इसमें 90% भागीदारों ने इसका आयोजन अप्रैल में किये जाने पर अपनी सहमति जताई. अप्रैल में इसके आयोजन के पीछे एक और वजह यह भी थी कि उत्पादकों को अपने उत्पाद बनाने के लिए उचित समय मिल सके ताकि चीन और हांगकांग के शो के लिए जाने से पहले खरीदारों को अप्रैल के दौरान आयोजित इस शो में आने लिए प्रोत्साहित किया जा सके। चूंकि ईपीसीएच हस्तशिल्प निर्यातकों की एस सर्वोच्च संस्था है, लिहाजा इसके सदस्यों से मिले फीडबैक का आदर किया जाना था, इसलिए प्रशासनिक समिति के सदस्यों ने आईएचजीएफ- दिल्ली मेला स्प्रिंग के आयोजन को फरवरी से तब्दील कर 15-19 अप्रैल 2020 करने का फैसला लिया है.
 कुमार ने विस्तार से बताया कि ईपीसीएच भारतीय हस्तशिल्प एवं उपहार मेले का साल 1994 से आयोजन करती आ रही है. इस मेले के पहले संस्करण का आयोजन जनवरी 1994 में नई दिल्ली स्थित प्रगति मैदान के 5500 वर्ग मीटर क्षेत्र में 313 प्रदर्शकों के साथ किया गया था. उस मेले में 515 खरीदारों ने शिरकत की थी. उन्होंने बताया कि 2006 से यह मेला ग्रेटर नोएडा स्थित अत्याधुनिक प्रदर्शनी केंद्र यानी इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित किया जा रहा है. भारतीय हस्तशिल्प और उपहार मेले (इंडियन हैंडीक्राफ्ट्स ऐंड गिफ्ट फेयर) में बड़ी तब्दीली करते हुए 2014 में इसे आईएचजीएफ-दिल्ली मेला का नाम दिया गया और पहले से कहीं बड़े स्तर पर पांच दिनों के लिए आयोजित किया जाने लगा.
इस शो के स्प्रिंग संस्करण में प्रदर्शकों, प्रदर्शन क्षेत्र, खरीदारों की संख्या और बिजनेस के मामले में तेजी से इजाफा हुआ है. 1994 में जो मेला 5500 वर्ग मीटर के प्रदर्शन क्षेत्र के साथ शुरू किया गया था वो फरवरी 2019 में 3189 प्रदर्शकों और 6737 खरीदारों के आगमन के साथ 1,90,000 वर्ग मीटर के बड़े क्षेत्र में आयोजित किया गया. उस दौरान 2900 करोड़ रुपये का बिजनेस हुआ। 
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