आकाश नागर, ग्रेटर नोएडा 
ग्रेटर नोएडा में एक गांव है, कचैड़ा वारसाबाद. ये गांव दो बार खबरों में रहा. एक बार तब जब केंद्रीय मंत्री डाँ. महेश शर्मा ने इसे 16 सितंबर 2017 को आदर्श गाँव बनाने के लिए  गोद लिया था. एक बार 28 अक्टूबर 2018 में तब जब इसी गांव के बाहर बोर्ड लग गया. बोर्ड में लिखा गया कि ‘सांसद महेश शर्मा द्वारा  गोद लिया गया गांव. बीजेपी वालों का इस गांव में आना सख्त मना है.’
अब आप सोच रहे होंगे कि एक सांसद-मंत्री का गोद लिया गांव अचानक से बागी कैसे हो गया? हालांकि ये मैटर तो नया है लेकिन इसकी नींव पुरानी है. गाव वाले अपनी पीडा कुछ यू बताते है '24 अक्टूबर 2018 को जब हम लोग भोर में जागे तो देखा 25-30 जेसीबी मशीनें हमारी धान की फसल बरबाद करने में लगी हैं. जो हमने 6 महीने पहले बोई थीं. 100 के करीब पुलिस वाले खड़े थे ताकि गांव वाले विरोध न कर सकें. हमने विरोध किया तो लाठियां पड़ीं. विरोध करने पर 86 गांव वालों को प्रॉब्लम खड़ी करने के लिए अरेस्ट कर लिया गया था तुरंत जेल भेज दिया गया . इनमें प्रधान पूर्व प्रधान सभी शामिल है । 14 दिन की जेल काटने के बाद बामुश्किल गाँव वाले दीपावली की आधी रात अपने घरो में पहुंचे । तब से गाँव वालो का वेवसिटी के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना चला आ रहा हैं । वेवसिटी से झगडे की फसाद जानने के लिए आपको 12 साल पूर्व में जाना पडेगा ।

ये झांकी है एक 12 साल पुराने बवाल की. 2005-06 में वेवसिटी बिल्डर ने ये जमीन खरीदी थी. जमीन खरीद के डाल दी लेकिन फिर हाल खबर लेने भी नहीं आए. गांव वालों ने उस जमीन पर अपनी खेती बाड़ी चालू रखी. 24 अक्टूबर 2018  को अचानक बिना किसी पूर्वसूचना के भारी भारी जेसीबी मशीनें आईं और कचैडा को उजाड़खंड बना दिया गया .
गांव वालों का कहना है कि सत्ताधारी नेताओ ने किसानो का साथ नही दिया . जो वादे बिल्डर ने उनकी जमीन लेते वक्त किए वह भी पूरे नही किए ।  इसी वजह से गुस्सा जो है वो सातवें आसमान पर जा पहुंचा और तभी शांत हुआ जब गांव के बाहर ये ‘बीजेपी नॉट अलाउड’ वाला बोर्ड लग गया. गांव के लोगो का कहना है कि सांसद महेश शर्मा ने सिर्फ नाम के लिए ये गांव गोद लिया था. इसके चलते ही शर्मा ने गाँव को गोद लेकर अनाथ की तरह छोड दिया । आपको विश्वास नही होगा कि सांसद द्वारा गोद लिए हुए गाँव कचैडा में पिछले दो साल में शर्मा ने विकास के नाम पर एक ईट भी नही लगाई है । गाँव कचैडा के किसानो की यह बदकिस्मती ही कही जाएगी कि साढे चार माह से वह आंदोलन चला रहे है लेकिन उनकी कोई सुनवाई नही हो रही है ।
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