गौतमबुद्धनगर । (शफ़ी मोहम्मद सैफी)गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित  नवीकरणीय ऊर्जा की पांच दिवसीय कार्यशाला में आए मुख्य अतिथि भारत सरकार के नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से डॉक्टर सोहेल अख्तर , ऊर्जा मंत्रालय से प्रोफेसर मोहम्मद मोअज्जम, भारतीय प्रद्योगिकी संस्थान रुड़की के प्रोफेसर एच. के. वर्मा एवं मणिपाल विश्वविद्यालय से डॉक्टर आशीष श्रीवास्तव  इस उद्घाटन  में सम्मिलित हुए।डॉक्टर सुहेल अख्तर ने कहा कि सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा प्रकाश के रूप में पृथ्वी पर 4 से 7 किलो वाट प्रति वर्ग मीटर प्रतिदिन के दर से मिलती है। अगर इस ऊर्जा का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो सन 2022 तक 175 गीगा वाट की सोलर ऊर्जा स्थापित की जा सकेगी

  जिससे उपभोक्ताओं को कम दर से बिजली मुहैया कराई जाएगी और इससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय प्रोफ़ेसर बीपी शर्मा, रजिस्ट्रार महोदय  बच्चू सिंह, डॉक्टर इन्दु उप्रेती एवं  प्रोफ़ेसर एन. पी. मल्कानीय़ा ने उसके दौरान अपने अपने विचार रखे। कार्यशाला में विभिन्न तकनीकी केंद्रों से 100 से अधिक विद्यार्थी तथा अध्यापकों ने भाग लिया। यहां मौजूद कई अध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने इस अधिवेसन को महत्वपूर्ण बताया और विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि इससे विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इस क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा स्टार्टअप के लिए अनुदान भी मिलेंगे जिससे उनको इस क्षेत्र में नई राह मिलेगी।
 कार्यशाला के दूसरे दिन प्रोफेसर एच. के. वर्मा, डी. टी. यू. से प्रोफेसर मुख्तीयार सिंह तथा ईटेप कंपनी के सुशील ऒझा एवं उनके साथी उपस्थित रहे। प्रोफेसर एच. के. वर्मा ने बताया कि सौर  ऊर्जा के सभी स्टेशन तथा सब स्टेशन को जोङकर हम अधिक लाभ ले सकते है । इस पर उन्होने चृचा की, तथा प्रोफेसर मुख्तीयार सिंह ने विद्युत चालित वाहनों के विषय मे बताया । इसके बायद इस दिन के दूसरे अधिवेशन मे  ईटेप कंपनी के सुशील ऒझा एवं उनके साथी द्वारा सॉफ्टवेयर की जानकारी दी एवं अभ्यास भी कराया गया ।इस कार्यक्रम को डॉक्टर ओमवीर सिंह एवं डॉक्टर मनमोहन शिशोदिया ने व्यवस्थित कराय़ा।
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