प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 53वीं बार मन की बात की। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने पुलवामा में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि आज मेरा मन भरा हुआ है लेकिन कार्यक्रम के आखिरी में पीएम ने 2019 लोकसभा चुनाव जीतने का दावा करते हुए कहा कि आप लोगों से सालों साल ऐसे ही बात करता रहूंगा
।  पीएम ने कहा, मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार। मन की बात शुरू करते हुए आज मन भरा हुआ है। 10 दिन पूर्व, भारत-माता ने अपने वीर सपूतों को खो दिया। पुलवामा के आतंकी हमले में, वीर जवानों की शहादत के बाद देश-भर में लोगों को और लोगों के मन में, आघात और आक्रोश है भारत-माता की रक्षा में, अपने प्राण न्योछावर करने वाले, देश के सभी वीर सपूतों को, मैं नमन करता हूं। यह शहादत, आतंक को समूल नष्ट करने के लिए हमें निरन्तर प्रेरित करेगी, हमारे संकल्प को और मजबूत करेगी। हमारे सशस्त्र बल हमेशा ही अद्वितीय साहस और पराक्रम का परिचय देते आये हैं। शांति की स्थापना के लिए जहां उन्होंने अद्भुत क्षमता दिखायी है वहीँ हमलावरों को भी उन्हीं की भाषा में जबाव देने का काम किया है।'

वीर सैनिकों की शहादत के बाद, मीडिया के माध्यम से उनके परिजनों की जो प्रेरणादायी बातें सामने आयी हैं उसने पूरे देश के हौंसले को और बल दिया है। शहीदों के हर परिवार की कहानी, प्रेरणा से भरी हुई हैं । मैं युवा-पीढ़ी से अनुरोध करूंगा कि वो, इन परिवारों ने जो जज्बा दिखाया है, जो भावना दिखायी है उसको जानें, समझने का प्रयास करें। आजादी के इतने लंबे समय तक, हम सबको, जिस वार मेमोरियल का इंतजार था। मैंने निश्चय किया कि देश में, एक ऐसा स्मारक अवश्य होना चाहिए।

वार मेमोरियल को लेकर पीएम ने कहा कि मुझे विश्वास है ये देशवासियों के लिए राष्ट्रीय सैनिक स्मारक जाना किसी तीर्थ स्थल जाने के समान होगा। राष्ट्रीय सैनिक स्मारक स्वतंत्रता के बाद सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक है। राष्ट्रीय सैनिक स्मारक का डिजाईन, हमारे अमर सैनिकों के अदम्य साहस को प्रदर्शित करता है। राष्ट्रीय सैनिक स्मारक का कांसेप्ट, फोर कंसेंट्रिक सर्कल्स यानी चार चक्रों पर केंद्रित है- अमर चक्र, वीरता चक्र, त्याग चक्र, रक्षक चक्र।

मन की बात के लिए आपके हजारों पत्र और कमेंट, मुझे पढ़ने को मिलते हैं। इस बार आतिश मुखोपाध्याय ने लिखा, वर्ष 1900 में 3 मार्च को, अंग्रेजों ने बिरसा मुंडा को गिरफ्तार किया था ये संयोग ही है कि 3 मार्च को ही जमशेदजी टाटा की जयंती भी है। मन की बात में ‘बिरसा मुंडा’ और ‘जमशेदजी टाटा’ को श्रद्धांजलि देने का एक प्रकार से झारखंड के गौरवशाली इतिहास और विरासत को नमन करने जैसा है।

भगवान ‘बिरसा मुंडा’ ने अंग्रेजों से ना केवल राजनीतिक आज़ादी के लिए संघर्ष किया बल्कि आदिवासियों के सामाजिक और आर्थिक अधिकारों के लिए भी लड़ाई लड़ी। जमशेदजी टाटा ने देश को बड़े-बड़े संस्थान दिए हैं। वे जानते थे कि भारत को विज्ञान, तकनीक, उद्यम का हब बनाना भविष्य के लिए आवश्यक है। ये उनका ही विजन था जिससे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की स्थापना हुई टाटा स्टील जैसे कई विश्वस्तरीय संस्थान, उद्योगों की स्थापना हुआ। हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री #मोरारजीदेसाई का जन्म 29 फरवरी को हुआ था। सहज, शांतिपूर्ण व्यक्तित्व के धनी, मोरारजी भाई देश के सबसे अनुशासित नेताओं में से थे।
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