गौतमबुद्धनगर। (शफ़ी मोहम्मद सैफ़ी)  2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में दो धुर विरोधी पार्टियों (सपा और बसपा) ने भाजपा के खिलाफ गठबंधन कर अपनी मंशा जाहिर कर दी है। दोनों दलों ने आगामी चुनावों में सीट बंटवारे का भी एलान कर दिया है। इससे भाजपा खेमे में बेचैनी है। राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सपा-बसपा के गठजोड़ को अवसरवादी, भ्रष्ट और जातिवादी करार दिया है। उधर, सपा-बसपा खेमे में खुशी है। खुशी इस बात की है कि राज्य की 80 संसदीय सीटों पर होने वाले लोकसभा चुनाव में न केवल गठबंधन अधिक सीटों पर जीतेगा बल्कि भाजपा के कई कद्दावर नेताओं को भी पटखनी देगा। बता दें कि अगर 2014 के लोकसभा चुनाव जैसा ही वोटिंग पैटर्न रहा तो मोदी सरकार के सात मंत्री लोकसभा चुनाव हार सकते हैं। हालांकि, 2014 जैसी मोदी लहर अब नहीं है। 2014 में सपा, बसपा, कांग्रेस अलग-अलग लड़ी थीं जबकि भाजपा गठबंधन के तहत चुनाव लड़ी थी।
महेश शर्मा गौतम बुद्ध नगर से भाजपा के सांसद हैं और केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। 2014 के चुनावों में उन्हें पांच लाख 99 हजार 702 वोट मिले थे। उनके खिलाफ सपा को तीन लाख 19 हजार 490 वोट और बसपा को एक लाख 98 हजार 237 वोट मिले थे। वैसे तो इन दोनों के जोड़ के बाद भी महेश शर्मा करीब 82 हजार वोट से आगे रहते हैं लेकिन मोदी लहर नहीं होने, बहुजन एकता और एंटी इनकमबेंसी फैक्टर की वजह से उन पर भी संकट मंडरा सकता है।
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