ग्रेटर नोएडा। (शफ़ी मोहम्मद सैफ़ी)शारदा विश्वविद्यालय के लिए आज का दिन स्वर्णिम अध्याय के तौर पर याद किया जाएगा। उज़्बेकिस्तान सरकार के अंदिजन क्षेत्र के गवर्नर अब्दुरख्मोनोव शुद्रतबेक ने आज शारदा विश्वविद्यालय का भ्रमण करके विश्वविधालय स्थापित करने के परियोजना पर अपने सरकार के सकारात्मक रुख से अवगत कराया तथा जल्द से जल्द आरंभ करने का आग्रह किया। आज के पांच सदस्यों का शिष्ट मंडल ने अपने सरकार के निर्णयों से शारदा विश्वविद्यालय प्रबन्ध को अवगत कराया। गत सप्ताह ही उज्बेकिस्तान के भारत स्थित राजदूत तथा शारदा विश्वविधालय के चांसलर पी के गुप्ता ने एक समझौता पर हस्ताक्षर किये थे जिसके तहत शारदा विश्वविधालय उज्बेकिस्तान का स्थापना होगा| इसके पहले चांसलर पी के गुप्ता के निर्देश पर शारदा विश्वविद्यालय के अन्तर्राष्ट्रीय संबंध विभाग के अध्यक्ष अशोक दरयानी के नेतृत्व में एक वरिष्ठ अधिकारीयों का दल उज़्बेकिस्तान का विस्तृत भ्रमण करके अपना रिपोर्ट सौंपा। ये पहला अवसर है जब किसी सरकार ने भारत के संस्थान को अपने देश में विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया हो। शारदा विश्वविद्यालय पहले चरण में इंजीनियरिंग तथा मैनेजमेंट का पढ़ाई आरंभ करेगा उसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य पाठयक्रमों को संचालित किया जाएगा। पहला सत्र इसी साल जुलाई से आरम्भ होगा| प्रो आर एम् मेहरा को पाठ्यक्रम तथा अन्य क्षेत्रों में संयोजन का जिम्मा दिया गया है| 
आज के बैठक में शारदा विश्वविद्यालय तरफ से चांसलर पी के गुप्ता, प्रो चांसलर वाई के गुप्ता, डीन प्रो सर्यप्रकाश राव, रूपेंद्र सिंह, डॉ मुकेश चतुर्वेदी, डॉ रेणु गुप्ता, डॉ मनीषा जिंदल, डॉ राजेश कुमार सहित विश्वविद्यालय के सभी डीन तथा विभागाध्यक्ष, परीक्षा नियंत्रक आर सी सिंह तथा कुलसचिव आर डी सहाय उपस्थित थे। चांसलर पी के गुप्ता ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि भारत प्राचीन काल से उच्चस्तरीय शिक्षा के लिए जाना जाता है चाहे वो बोधगया हो या विक्रमशिला या नालंदा। शारदा ट्रस्ट उज़्बेकिस्तान में उच्च शिक्षा का सर्वश्रेष्ठ तकनीक उपलब्ध कराने के लिए वचनबद्ध है। इस पर  पर वहां के गवर्नर ने संतोष जाहिर करते हुए शारदा ग्रुप को धन्यवाद दिया तथा उम्मीद जताई की वहां भी विश्वस्तरीय विश्वविधालय का स्थापना होगा|




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